राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में

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मुख्यमंत्री के रूप में श्रीमती वसुन्धरा राजेः नए राजस्थान की अग्रदूत

वर्ष 2003 के राजस्थान के विधानसभा चुनाव कुछ खास थे, इन चुनावों में राज्य की जनता ने पहली बार किसी महिला को मुख्यमंत्री के रूप में चुना था।प्रदेश की जनता के भारी जनादेश ने भाजपा को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाया और इसी के चलते श्रीमती वसुन्धरा राजे मुख्यमंत्री का कार्यभार सौपा गया।

यह वह दौर था जब प्रदेश के हालात बहुत खराब थे। चारों और अराजकता फैली थी। राजस्थान विशेष तौर पर सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ राज्य था। लेकिन राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री ने राज्य के सम्पूर्ण विकास को एक चुनौती के रूप में लिया। अगले पांच सालों तक श्रीमती वसुन्धरा राजे और उनके मंत्रीमण्डल के सदस्यों ने राजस्थान के समग्र विकास हेतु व्यापक योजनाओं का संचालन किया। इस समय प्रदेश में कई समस्याए थी जिनमें प्रमुख थी, भुखमरी, कुपोषण और गरीबी। राज्य को इन समस्याओं से बाहर निकालने के लिए एक सबसे जरूरी चीज यह थी, कि सभी को रोजगार प्रदान किया जाए।प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस दिशा में कार्य करते हुए, बुनियादी आर्थिक ढ़ाचें व मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण को अधिक प्राथमिकता दी। वहीं प्रदेश को महिला मुख्यमंत्री होने का भी फायदा भी मिला। भाजपा शासन में महिला सशक्तिकरण पर भी प्रमुख रूप से ध्यान केंद्रित किया गया।

भाजपा सरकार ने प्रदेश में पांच साल की अवधि में 7,000 करोड़ रूपये सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए खर्च किए। फीडर विकास कार्यक्रम में बिजली की छीज़त से होने वाले नुकसान को घटाने के लिए 8,000 करोड़ रूपये खर्च किए गए। इसके साथ ही कई बिजली उत्पादन ईकाईयों को भी शुरू किया गया। राजस्थान, जो कि एक कृषि प्रधान प्रदेश हैं, में पिछली सरकार द्वारा नहरों के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया था। इस ओर श्रीमती वसुन्धरा की सरकार ने प्राथमिकता को समझा और नहर प्रणाली के रखरखाव के लिए धनराशि आवंटित की।

श्रीमती वसुन्धरा का जनभागीदारी में द्दढ़ विश्वास है। वें चाहती है कि शासन से जुडे़ मामलों में आमजन का भी जुड़ाव हो। इसीलिए उन्होंने राज्य में पीपीपी का सबसे पहला प्रयोग किया और आर.आई.डी.सी.ओ.आर (रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन प्रोजेक्ट) की शुरूआत हुई। इस परियोजना को विशेष रूप से राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को सुधार ने के लिए लागू किया गया था। वसुन्धरा जी के कार्यकाल की एक और उपलब्धि थी राजस्थान मिशन ऑन लाइव्लीहुड। जिसमें शिक्षित युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया, ताकि उनमें रोजगार के बारे में जागरूकता आ सके। इसके साथ ही युवाओं के लिए राजस्थान नालेज कॉर्पोरेशन भी स्थापित किए गए। जिससे युवाओं को कम्प्यूटर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन प्रयासों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा। इसी के चलते जेनपेक्ट, इंफोसिस, विप्रो, टेक महिंद्रा, जर्मन बैंक ने भी अपनी शाखाएं जयपुर में खोली।

राजस्थान शिक्षा पहल योजना के चलते शिक्षा के क्षेत्र को और बढ़ावा देने के लिए सिस्को, आईबीएम, एनआईआईटी, माइक्रोसॉफ्ट और ऐसी ही कई निकायों जैसे विश्व आर्थिक मंच और वैश्विक ई स्कूलों ने भी अपना योगदान दिया। वहीं इस समय राजस्थानी हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को भी सरकारी सहायता प्रदान कर पुनःजीवित किया।

श्रीमती वसुन्धरा के कार्यकाल में आंगनवाड़ी में प्री-स्कूल के बच्चों को दोपहर का भोजन वितरित करने के साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बीमा जैसी कई लोकहित योजनाओं की शुरूआत की गई। यह वह समय था जब राजस्थान राज्य को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) के संचालन के लिए एक मॉडल राज्य का दर्जा प्रदान किया गया था। राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री ने अपने पांच साल के कार्यकाल में बिजली क्षेत्र का विकास, गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण, कृषि और बुनियादी विकास के ढांचे को मजबूती और राज्य के सम्पूर्ण विकास को सकारात्मक दिशा प्रदान की।

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