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पर्यटन में है देश की सबसे बड़ी उम्मीद

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भारत में मौजूद संभावनाओं का एक छोटा सा हिस्सा भी अब तक साकार नहीं हो सका है

पर्यटन न केवल देश का सबसे बड़ा रोजगार पैदा करने वाला उद्योग बन सकता है, बल्कि रोजगार में लिंग असमानता को दूर करने में भी इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है। हाल में ‘रिसर्जेंट राजस्थान’ में एक चुनौतीपूर्ण प्रश्न यह उभरा कि भारत आने वाले पर्यटकों की कुल संख्या सिर्फ पेरिस के लूव्र संग्रहालय आने वालों से भी कम क्यों है/ आखिर वजह क्या है कि समूचे राजस्थान में कंबोडिया के अंकोरवाट के मुकाबले कम पर्यटक पहुंचते हैं/ ये अहम सवाल हैं। पर्यटन दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग है। यह लोगों को रोजगार तक लाने के बजाय रोजगार को लोगों तक ले जाता है।

इसमें कई और उद्योगों की तुलना में प्रति रोजगार कम पूंजी की आवश्यकता होती है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को इसमें ज्यादा रोजगार मिलता है और सभ्यता-संस्कृति की रक्षा यह जिस तरह करता है, वह सरकारों द्वारा कभी संभव नहीं है। भारत पर्यटकों को ऐसे सांस्कृतिक, वैचारिक और आध्यात्मिक अनुभव कराता है, जो कुछ गिने-चुने देशों में ही उपलब्ध हैं। ‘भारत पधारिए मिशन’ के जरिए हर साल यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या 70 लाख से बढ़ाकर पांच करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण होगा।

ओपन एयर थियेटर

राजस्थान को भारत का विशालतम ओपन एयर थियेटर कहा जाता है। अभी राज्य का लक्ष्य विदेशी पर्यटकों की संख्या मौजूदा 10 लाख सालाना से बढ़ाकर अगले पांच साल में 50 लाख करने का है। राजस्थान के पर्यटन का पहला चरण आजादी से लेकर 80 के दशक तक चला और इस दौरान प्राकृतिक दृश्यों पर जोर रहा। दूसरे चरण की शुरुआत 80 के दशक में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ इतिहास को उसी अंदाज में पेश करने वाले हेरिटेज होटलों से हुई। लेकिन तीसरा चरण चुनौतीपूर्ण है और इसे हासिल करने के लिए साहित्य, संगीत और लोक त्योहारों पर जोर देना होगा। साथ ही नए संग्रहालय बनाने होंगे। प्रदर्शनियां और अन्य तरह के आयोजन करने होंगे, ताकि पर्यटक उसी हिसाब से अपने सफर की योजना बना सकें।

इसमें सड़कों का विकास, पर्यटक पुलिस, स्वच्छता, सरकारों के बीच सहयोग के साथ-साथ और भी बहुत कुछ शामिल है। सिंगापुर से समझौते के बाद सीधी उड़ान शुरू हुई है और मेहमान नवाजी से जुड़े कौशल विकास के लिए एक केंद्र बनाया जा रहा है। हमारा विश्वास है कि लाखों नए पर्य़टकों के आने से कुछ समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी। जैसे एयरलाइंस कंपनियां बड़ी संख्या में पर्यटक न होने पर उड़ानों की संख्या नहीं बढ़ातीं। अभी उड़ानों का हाल यह है कि जयपुर से जोधपुर जाने के लिए पहले मुंबई या दिल्ली जाना पड़ता है। बिना बेहतर कनेक्टिविटी के बड़ी संख्या में पर्यटकों का आना संभव नहीं है।

10 लाख रुपये के निवेश से पर्यटन में 78 रोजगार पैदा किए जा सकते हैं, जबकि मैन्युफैक्चरिंग में यह संख्या सिर्फ 45 है

‘अतुल्य भारत’ के साथ-साथ केरल, गुजरात और मध्य प्रदेश के अभियानों के नतीजों से प्रेरणा लेकर जल्द ही राजस्थान पर्यटन का तीसरा चरण शुरू होगा, जिसमें वैश्विक स्तर पर बहुआयामी मार्केटिंग अभियान पर जोर दिया जाएगा। अनुमानों के मुताबिक पर्यटन क्षेत्र में प्रति 10 लाख रुपये के निवेश पर रोजगार के 78 नए अवसर पैदा होते हैं। मैन्युफैक्चरिंग में यह आंकड़ा केवल 45 का है। लेकिन पर्यटन पर जोर दिए जाने की दूसरी वजह ज्यादा महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर नजर डालें तो पर्यटन में 65 फीसदी रोजगार महिलाओं के पास हैं। मैकिंसी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की हाल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक अगर करीब 7 करोड़ अतिरिक्त महिलाओं को घर से बाहर निकल कर इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, बीपीओ और पर्यटन क्षेत्र में काम करने के लिए तैयार कर दिया जाए तो 2025 तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद 700 अरब डॉलर बढ़कर 2900 अरब डॉलर हो जाएगा।

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि राजस्थान में महिला श्रमशक्ति के योगदान की दर कुछ राज्यों से ज्यादा है। राजस्थान में यह आंकड़ा 4.2 फीसदी है जबकि कर्नाटक में 3.5, मध्य प्रदेश में 3.2 और उत्तर प्रदेश में 2.5 प्रतिशत है। मेरे विचार से इसमें से ज्यादातर कम मजदूरी वाला या गुजारे के लिए किया जाने वाला स्वरोजगार शामिल है। मैं इस धारणा से भी सहमत नहीं हूं कि बाहर निकल कर काम करना घर में बिना पहचान और भुगतान के किए जाने वाले काम से बेहतर है। हम बाजार में नहीं, समाज में रहते हैं।

पर्यटन के प्रति मेरे जुनून की वजह यह है कि इससे स्थानीय स्तर पर काम करने के तमाम ऐसे लचीले विकल्प पैदा होते हैं, जिनकी गैरमौजूदगी फिलहाल महिलाओं को वैतनिक श्रमशक्ति के रूप में सोचने से भी रोकती है। पर्यटन के तीन परंपरागत ‘ए’- एक्सेस यानी पहुंच, अकॉमडेशन यानी ठहरने की व्यवस्था और एमिनिटीज यानी सुविधाओं के साथ-साथ अब चौथे ‘ए’ आर्टिकुलेशन यानी समझाने की भी जरूरत महसूस हो रही है। किसी व्यक्ति या समूह के पर्यटन संबंधी फैसलों पर ऑनलाइन समीक्षाओं, गूगल मैप्स आदि का क्रांतिकारी असर पड़ रहा है।

सफर के बाद

हाल में फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा था कि जब वह कठिन दौर से गुजर रहे थे तो स्टीव जॉब्स की सलाह पर उन्होंने भारत का दौरा किया था। खुद जॉब्स ऐसा दौरा पहले ही कर चुके थे। फेसबुक या ऐपल की स्थापना के लिए भारत किसी तरह का श्रेय नहीं ले सकता, लेकिन अपने पसंदीदा यात्रा वृत्तांत लेखक पॉल थेरू के शब्दों में कहूं तो ‘सफर से लौटने के बाद आप बदले हुए होते हैं, और पहले जैसे फिर कभी नहीं होते’।

      (लेखिका राजस्थान की मुख्यमंत्री हैं)